वांछित मन्त्र चुनें

नम॑स्ते॒ हर॑से शो॒चिषे॒ नम॑स्तेऽअस्त्व॒र्चिषे॑। अ॒न्याँस्ते॑ऽअ॒स्मत्त॑पन्तु हे॒तयः॑ पाव॒कोऽअ॒स्मभ्य॑ꣳशि॒वो भ॑व ॥२० ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

asd

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

नमः॑। ते॒। हर॑से। शो॒चिषे॑। नमः॑। ते॒। अ॒स्तु॒। अ॒र्चिषे॑ ॥ अ॒न्यान्। ते॒। अ॒स्मत्। त॒प॒न्तु॒। हे॒तयः॑। पा॒व॒कः। अ॒स्मभ्य॑म्। शि॒वः। भ॒व॒ ॥२० ॥

यजुर्वेद » अध्याय:36» मन्त्र:20


बार पढ़ा गया

हिन्दी - स्वामी दयानन्द सरस्वती

अब ईश्वर की उपासना का विषय अगले मन्त्र में कहा है ॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे भगवन् ईश्वर ! (हरसे) पाप हरनेवाले (शोचिषे) प्रकाशक (ते) आपके लिये (नमः) नमस्कार तथा (अर्चिषे) स्तुति के योग्य (ते) आपके लिये (नमः) नमस्कार (अस्तु) प्राप्त होवे (ते) आपकी (हेतयः) वज्र के तुल्य अमिट व्यवस्था (अस्मत्) हमसे (अन्यान्) भिन्न अन्यायी शत्रुओं को (तपन्तु) दुःख देवें, आप (अस्मभ्यम्) हमारे लिये (पावकः) पवित्रकर्त्ता (शिवः) कल्याणकारी (भव) हूजिये ॥२० ॥
भावार्थभाषाः - हे परमेश्वर ! हम लोग आपके शुभ गुण, कर्म, स्वभावों के तुल्य अपने गुण, कर्म, स्वभाव करने के लिये आपको नमस्कार करते हैं और यह निश्चित जानते हैं कि अधर्मियों को आपकी शिक्षा पीड़ा और धर्मात्माओं को आनन्दित करती है, इसलिये मङ्गलस्वरुप आपकी ही हम लोग उपासना करते हैं ॥२० ॥
बार पढ़ा गया

संस्कृत - स्वामी दयानन्द सरस्वती

अथेश्वरोपासनाविषयमाह ॥

अन्वय:

(नमः) (ते) तुभ्यम् (हरसे) हरति पापानि तस्मै (शोचिषे) प्रकाशाय (नमः) (ते) तुभ्यम् (अस्तु) (अर्चिषे) स्तुतिविषयाय (अन्यान्) (ते) (अस्मत्) (तपन्तु) (हेतयः) वज्र इव व्यवस्थाः (पावकः) पवित्रकर्त्ता (अस्मभ्यम्) (शिवः) कल्याणकारकः (भव) ॥२० ॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे भगवन् ! हरसे शोचिषे ते नमो अर्चिषे ते नमोऽस्तु हेतयस्तेऽस्मदन्यांस्तपन्तु त्वमस्मभ्यं पावकः शिवो भव ॥२० ॥
भावार्थभाषाः - हे परमेश्वर ! वयं भवच्छुभगुणकर्मस्वभावतुल्यानस्मद्गुणकर्मस्वभावान् कर्त्तुं ते नमस्कुर्मो निश्चितमिदं जानीमोऽधार्मिकाँस्ते शासनाः पीडयन्ति धार्मिकाँश्चानन्दयन्ति तस्मान्मङ्गलस्वरूपं भवन्तमेव वयमुपास्महे ॥२० ॥
बार पढ़ा गया

मराठी - माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - हे परमेश्वरा ! तुझ्या गुण, कर्म, स्वभावानुसार आमचे गुण, कर्म, स्वभाव व्हावेत. यासाठी आम्ही तुला नमस्कार करतो व हे निश्चित जाणतो की, तुझी व्यवस्था अधार्मिक लोकांना दुःख देते आणि धार्मिक लोकांना आनंदी करते. म्हणून आम्ही कल्याणमय असणाऱ्या तुझी उपासना करतो.